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Film HUM HUM HAIN Has Become An Entertainment Movie Due To Skillful Direction...

कुशल निर्देशन की वजह से फ़िल्म “हम हम हैं” मनोरंजक मूवी बन गई है

फ़िल्म समीक्षा ;  “हम हम हैं”

निर्माता ;  देवेंद्र लाडे व प्रदीप राजभर

रेटिंग्स : 3.5 स्टार्स

लंबे समय के बाद दर्शकों को थियेटर में हिंदी फिल्म देखने को मिली है। हालांकि कोरोना बीमारी की दहशत के चलते लोग सिनेमाघरों से दूर ही रहना चाह रहे हैं लेकिन इन प्रतिकूल हालात में भी कुछ निर्माता रिस्क लेकर फ़िल्म रिलीज़ कर रहे हैं। फाइव फ्रेंड्स एंटरटेनमेंट के बैनर तले बनी फ़िल्म “हम हम हैं” के निर्माता देवेंद्र लाडे व प्रदीप राजभर ने हिम्मत दिखाते हुए दर्शकों के लिए फ़िल्म को थियेटर्स में रिलीज़ कर दिया है। उनका मानना है कि किसी को तो पहल करनी ही पड़ेगी और हमें उम्मीद है कि अच्छी फिल्म देखने के लिए दर्शक खतरे उठाकर भी आएंगे।

फिल्म “हम हम हैं” मनोरजंन से भरपूर है

जिसमें नकुल गिल, पेंटाली सेन, सन्दीप यादव, देवेंद्र लाडे, मुस्लिम खान, सविता पापले, प्रेम सिंह कंटूरिया आदि कलाकारों ने सशक्त अभिनय का परिचय दिया है। फ़िल्म हम हम हैं के निर्देशक बिजेंद्र एस गंगवार हैं जिनके कुशल निर्देशन में कहानी मनोरंजक तरीके से आगे बढ़ती है। निर्देशक ने हर एक्टर से बखूबी काम लिया है। कह नहीं सकते कि किसी के रोल को वेस्ट किया गया है।

फ़िल्म के कहानी लेखक अब्दुल गफ्फार खान, गीतकार मुस्लिम खान, संगीतकार एस पी सेन की तिकड़ी ने फ़िल्म के हर पक्ष पर अपनी मज़बूत पकड़ साबित की है। संगीत कर्णप्रिय है जिसे स्वर दिया है नितिन तिवारी, गौतम गांगुली, प्रिया सेन और सुनीता पवार ने। राजू शबाना खान, सुनील मोटवानी की कोरियोग्राफी काबिलेतारीफ है।

 

इस फ़िल्म की कहानी गांव के प्रधान के मंदबुद्धि लड़के के इर्दगिर्द घूमती है जो मास्टर जी की लड़की से प्यार करने लगता है। क्या लड़का उस लड़की का दिल जीतने में सफल होता है, यह जानने के लिए आपको फ़िल्म देखनी होगी।

GOOD MORNING EMI SHORT FILM REVIEW

Mumbai: Due to the lockdown, there has been a lots of trouble for a common man to give EMI, there are lots of people facing many problems due to  the lock down. Have you ever thought that one day your mood is very bad and you get EMI calls from the bank, especially in the morning when you have not even woke up properly from sleep and you will get angry, an if you hear the abuse of EMI person. Let us tell you that on the MX-PLAYER platform, such a short film is released on 25th December Friday, which will make you afraid to ask for EMI too.

Yes, the film EMI released on Friday is being liked very much, it is a 10 minute short film. The story is about a man who is seen upset with his personal life. One morning when Chulbul is sleeping when his girl friend calls, he talks to his girl friend and sleeps again for 5 minutes. After 2 minutes, Chulbul’s phone rings again and he feels that his girl friend call him back but this time the call is from the EMI collector and he starts abusing in the morning, yet Chulbul was talking very softly. He talks to EMI person and ask him out to meet for settlement . During a conversation between Chulbul and EMI settler, Chulbul’s girl friend calls Chulbul quite often but his call was busy when Chulbul’s call her back his girl friend gets angry and took breaks up with Chulbul. After this, Chulbul meets EMI person and teaches him a lesson how to talk. To know more you have to watch this film.

Talking about the star cast of this film, actors Pratush Mishra, Deepak Singh Thakur, Actress Kritika Gupta, Nandita Shukla is seen. Jai Prakash Mishra is the writer and director of this film, produced by PSJ Media Vision .

People have loved this film a lot.

https://www.mxplayer.in/movie/watch-good-morning-emi-short-film-movie-online-c5acaa763e1945e130f6e4eba20b5b9f?utm_source=mx_android_share

Debutante Dilip Arya is striking as a Dacoit in TAANASHAH...

TAANASHAH – Rating 3.5 stars

This week see the release of a dacoit film which has already been critically acclaimed at several International Film Festivals. Once in a while comes a film on the dacoits like Mera Gaon Mera Desh, Sholay and the recently Gangs of Wasseypur. TAANASHAH promises to enter this elite list of Bollywood films on the dacoits.

Dilip Arya plays the protagonist Shiva whose father and sister are killed by the village Thakur, hence to avenge their death, Shiva kills the Thakur’s clan which leads to the police gunning for him. In his journey hiding from the cops, he comes in touch with a gang of dacoits.

Taanashah is loosely based on the life events of famous bandit Shiv Kumar Patel or Dadua. Shiv ruled the jungles of Bundelkhand uninterrupted for 28 and more years and by the time he was killed by STF in 2007, he had control over 14 MLA seats and he virtually decided who would rule UP next. The dreaded outlaw had evolved a powerful ecosystem with innumerable beneficiaries and no one dared go against him.

The dacoit Shiva is also revered by the village folk as he is like a village Robinhood. In the process, the local politician needs the dacoit’s help to win the election.

  

Then begins the game of betrayal and a web of politics and backstabbing.

Shot in real locations in Chitrakoot in UP, Mukesh Srivastava has written and produced this film that portrays the actual hinterland of India. Even today weapons are easily available in these places and one small mistake could erupt into rivarly in these ravines.

Astounding performance by Dilip Arya and the other cast. Each of the characters are perfectly selected, while the protagonist Daddu overshadows the film which has an earthy portrayals of the hinterlands of India.

Priyanka Singh’s Film Acid Inspires Change In Society And Thinking...

समाज और सोच में बदलाव लाने को प्रेरित करती है प्रियंका सिंह की फिल्म “एसिड”

फिल्म समीक्षा

फिल्म: एसिड: एस्टाउंडिंग क्रेज इन डिस्ट्रेस

निर्देशक: प्रियंका सिंह

रेटिंग्स: 4 स्टार्स

देश की लड़कियों के चेहरे पर तेजाब फेंकने जैसी सामाजिक बुराई पर बेस्ड फिल्म एसीआईडी: एस्टाउंडिंग क्रेज इन डिस्ट्रेस इसी सप्ताह रिलीज़ हुई है। रियल-लाइफ एसिड अटैक पर बेस्ड इस फिल्म को नवोदित डायरेक्टर-प्रोड्यूसर प्रियंका सिंह ने बनाया है। इस मूवी में एसिड अटैक की शिकार लड़की ‘रुहाना’ का लीड रोल भी उन्होंने ही निभाया है। फिल्म 3 जनवरी को देशभर में स्क्रीनशॉट मीडिया और एंटरटेनमेंट ग्रुप द्वारा रिलीज हो गई है।

जाहिर है कि दीपिका पादुकोण स्टारर फिल्म छपाक से इसकी तुलना की जा रही है मगर इसका ट्रीटमेंट अलग है और इसे बेहद रियलिस्टिक ढ़ंग से बनाया गया है। मेघना गुलज़ार की छपाक जहां एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल की स्टोरी है वहीं प्रियंका सिंह की एसिड भी यूपी के एक रियल-लाइफ इंसिडेंट पर आधारित है, जहां एक यंग लड़की पर तेजाब से हमला किया गया था। इस मूवी को देखने के बाद यह एहसास होता है कि इसे बनाने का उद्देश्य केवल एक सिनेमा बनाना नहीं है बल्कि इस सामाजिक बीमारी को लेकर देश और समाज में एक बहस शुरू करना है।

प्रियंका सिंह ने अपने निर्देशन का हुनर दिखाते हुए इस फिल्म के सीन्स को नाटकीय नहीं किया है बल्कि इसे रियलिस्टिक ढ़ंग से शूट किया है। इस फिल्म के जरिए इस तरह का खौफनाक क्राइम करने वालों के दिमाग में झांकने का भी प्रयास किया है।

एसिड के को-प्रोड्यूसर मान सिंह ने इस फिल्म में निगेटिव रोल भी किया है। यह मूवी पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं का संघर्ष दिखाती है। यह फिल्म किसी एक लड़की के बारे में नहीं है,बल्कि यह तमाम औरतों का दर्द दर्शाती है।

रांची की रहने वाली प्रियंका सिंह ने इसमें एसिड पीड़िता का रोल किया है।प्रियंका ने फिल्म में अभिनय के साथ ही निर्देशन भी किया है। इस फिल्म में एसिड अटैक पीड़िता की कहानी देखते हुए लोगों की रूह तक कांप जाती है। ऐसी कहानी को पर्दे पर पेश करना प्रियंका के लिए बड़ा चैलेंज था लेकिन लखनऊ की एसिड पीड़िता रुहाना की जिंदगी पर आधारित इस रोल को प्रियंका ने बड़ी शिद्दत से निभाया है। प्रियंका ने इस रोल को निभाने के लिए काफी तैयारी की है। उन्होंने कई एसिड पीड़िताओं के साथ समय गुजारा है, उनकी कहानी और दर्द को महसूस किया है।

फिल्म में विलेन बिलाल को दिखाया गया है जो एसिड फेंकता है। किस तरह की संकीर्ण मानसिकता ऐसे लोगों को अपराधी बनाती है। अपनी छोटी सोच और झूठी शान की खातिर वे रूहाना जैसी लड़कियों की जिंदगी बर्बाद कर देते हैं। इस मानसिकता को यह फिल्म जड़ से खत्म करने का मैसेज देती है। फिल्म यह भी सन्देश देती है कि उन बेटियों को हौसला और सहारा भी देना चाहिए जो इस जख्म से निकलकर अपनी जिंदगी में एक मुकाम बनाने के लिए और अपना हक हासिल करने के लिए संघर्ष कर रही हैं। फिल्म यह बात कहती है कि बुरी मानसिकता और गंदी सोच को समाप्त करने के लिए समाज के हर व्यक्ति को आगे आना होगा।

इस फिल्म को देश-विदेश के फिल्म फेस्टिवल में सराहा गया है और अब सिनेमाघरों में भी दर्शकों से बेहतर रिस्पॉन्स मिल रहा है। फिल्म एक बार अवश्य देखनी चाहिए।

रेटिंग्स 4 स्टार्स।

Antervyathaa Is The Most Promising Film Of This Week...

इस सप्ताह रिलीज़ होने वाली मोस्ट प्रॉमिसिंग फिल्म है ‘अंतर्व्यथा’

फिल्म समीक्षा

फिल्म ‘अंतर्व्यथा’

निर्देशक: केशव आर्या

निर्माता: दिनेश अहीर, भरत कवाड़, दीपक वशिष्ठ, सह निर्माता अक्षय यादव

कलाकार; हेमंत पाण्डेय, कुलदीप सरीन, गुलशन पाण्डेय , वीना चौधरी और केशव आर्या

रेटिंग्स: 4 स्टार्स

इस सप्ताह रिलीज़ होने वाली फिल्मों में निर्माता: दिनेश अहीर, सह निर्माता अक्षय यादव और निर्देशक केशव आर्या की फिल्म अंतर्व्यथा’ भी शामिल है, जो इस वीक की उम्दा फिल्म कही जा सकती है। बहुत सारे फिल्म फेस्टिवल्स में कई अवॉर्ड जीतने के बाद फिल्म ‘अंतर्व्यथा’ थियेटर में रिलीज हुई है. इस फिल्म से संगीतकार तोची रैना, हेमंत पांडे, कुलदीप सरीन, गुलशन पांडे, निर्देशक केशव आर्या, निर्माता दिनेश अहीर और सह निर्माता अक्षय यादव का नाम जुड़ा हुआ है।

उललेखनीय है कि इस फिल्म को दुनिया भर में अब तक 14 फिल्म फेस्टिवल्स में ८ अवार्ड्स मिल चुके हैं जिसमे बेस्ट डेब्यू फिल्म मेकर, बेस्ट डायरेक्टर, बेस्ट एक्टर के अवार्ड शामिल हैं.

निर्देशक केशव आर्य और प्रोड्यूसर दिनेश अहीर, भरत कवाड़, दीपक वशिष्ठ और को प्रोड्यूसर अक्षय यादव की इस फिल्म को आल इंडिया के सिनेमा घरों में रिलीज़ किया गया है ।

जहां तक इस फ़िल्म की कहानी और सब्जेक्ट का सवाल है तो इस का विषय एकदम अलग है, आजकल की तमाम फिल्मों से एक डिफरेंट सिनेमा है। इसकी कहानी हर दर्शक के दिल को छुएगी और वह इससे कनेक्ट कर पाएगा।

इस फ़िल्म में कबीरा फेम तोची रैना ने  खुबसूरत संगीत दिया है.

फिल्म में हेमंत पाण्डेय, कुलदीप सरीन, गुलशन पाण्डेय , वीना चौधरी और केशव आर्या ने गज़ब की अदाकारी की है।  सुशीला मीडिया टेक प्राइवेट लिमिटेड के बैनर तले बनाई गई फिल्म ‘अंतर्व्यथा’ की वन लाइनर यह है कि ‘ हर इंसान की एक अंतर्व्यथा होती है फिल्म इसी वन लाइनर पर बेस्ड है. हम बचपन में अक्सर झूठ बोल देते हैं, लेकिन मन में यह लगा रहता है कि हमने झूठ बोला है और सारी उम्र इंसान उस झूठ बोलने की गलती को महसूस करता रहता है. अपनी गलतियों को तो इन्सान दुसरे लोगों से छुपा सकता है, लेकिन वह उसे अपने आप से नहीं छुपा पाता. इन्सान को अपनी उस गलती के नतीजे में पैदा हुए अंदरूनी वेदना को झेलना ही पड़ता है। उसे अपने आप से जद्दोजहद करनी ही पड़ती है। यह मूवी यही दर्शाती है.”

फिल्म के निर्देशक और एक्टर केशव आर्य ने बड़ी मेहनत, लगन और शिद्दत से फिल्म ‘अंतर्व्यथा’ बनाई है. यह फिल्म सिनेमा लवर्स को एक बार अवश्य देखनी चाहिए, उन्हें निराशा नहीं होगी।

इस फिल्म को क्रिटिक रेटिंग्स 4 स्टार्स दी जाती है।

——Gazi Moin Ansari

Vinod Kumar’s Film Love In College Gives A Great Message Against Drugs...

ड्रग्स के विरुद्ध एक बेहतरीन सन्देश देती है विनोद कुमार की फिल्म “लव इन कॉलेज”

फिल्म समीक्षा: फिल्म “लव इन कॉलेज”

निर्माता विनोद कुमार

निर्देशक: विशन यादव

कलाकार: सपन कृष्णा, प्रिया, किरण कुमार, मुश्ताक खान, एहसान कुरैशी, अनिल यादव, दानिश राणा, रमेश गोयल

रेटिंग: 4 स्टार्स

इस सप्ताह रिलीज़ हुई निर्माता विनोद कुमार और डायरेक्टर विशन यादव की फिल्म “लव इन कॉलेज” यूथ खास कर कालेज ब्वायज और गर्ल्स के साथ साथ उनके पैरेंट्स के लिए आंख खोलने वाली एक फिल्म है। आर वी सीरीज मोशन पिक्चर्स के बैनर तले बनी यह फिल्म कॉलेज में ड्रग्स के बढ़ते चलन और नवजवानों पर पड़ रहे इसके बुरे प्रभाव को बखूबी दिखाती है। फिल्म “लव इन कॉलेज” का एक डायलॉग इसकी कहानी का सार है। “हम स्कूल कालेज को मंदिर का दर्जा देते हैं लेकिन कुछ लोगों ने उसे ड्रग्स का अड्डा बना कर रख दिया है.” यह आज के समाज का एक कड़वा सच है, जिसे फिल्म में प्रभावी रूप से पेश किया गया है। ड्रग्स के इस रैकेट में और कितने लोग शामिल होते हैं उनका भी पर्दा फाश किया गया है।

लव इन कॉलेज में एहसान कुरैशी, किरण कुमार और मुश्ताक खान जैसे एक्टर्स ने अपने काम से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया है।

फिल्म के गाने भी दर्शक बहुत पसंद कर रहे हैं। इस फिल्म में शान जैसे सिंगर्स ने अपनी आवाज़ दी है इसका म्यूज़िक ज़ी म्यूज़िक कंपनी ने रिलीज़ किया है।फिल्म को डिस्ट्रीब्यूटर शमशाद पठान ने अपने बैनर एस के इंटरप्राइजेज द्वारा रिलीज़ किया है।

इस फिल्म के लेखक अहमद सिद्दीकी, संगीतकार राजेश घायल, मिताली शाह, मलिका सिंह, दानिश राणा, सिंगर शान, सुष्मिता यादव, कोरियोग्राफर नरेंद्र चौहान, सरफराज खान हैं।
 

फिल्म के क्लाइमेक्स में किरण कुमार का एक इंस्पायरिंग संवाद है “जिस तरह स्कूल में बच्चो को छोड़ने उनके मां बाप जाते है उसी तरह पैरेंट्स को कॉलेज में भी जाकर देखना चाहिए कि उनके बच्चे किस वातावरण में पढ़ाई कर रहे हैं।”

दर्शकों को यह फिल्म एक बार अवश्य देखनी चाहिए।

रेटिंग : 4 स्टार्स