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Shantanu Maheshwari–Rinku Rajguru Starrer ‘Sahiya’ Still Awaits CBFC Certificate After Preview...

Is the film’s Naxal-affected backdrop overshadowing what is essentially a love story?

Mumbai: Shantanu Maheshwari and Rinku Rajguru starrer Sahiya, directed by Sanjay Sharma, continues to await its CBFC certificate even after its preview. The film, set against the backdrop of the forests of Jharkhand and a Naxal-affected region, has now sparked curiosity over whether its sensitive setting is playing a role in the prolonged certification process.

However, there is no official confirmation that the film has been denied certification or that any objection has been raised specifically over its Naxal-related backdrop. The film is currently awaiting certification, leaving its makers and the team looking forward to clarity on its release journey.

Interestingly, the makers insist that Sahiya should not be viewed merely as a film about Naxalism. At its core, the film is presented as a love story about two individuals whose relationship develops amid a difficult and conflict-affected environment.

A Love Story Set In The Jungle

Directed by Sanjay Sharma, Sahiya uses the forests and remote landscape of Jharkhand as an important part of its storytelling. The presence of police, conflict and a Naxal-affected environment forms the backdrop of the narrative, but the emotional centre of the film remains its characters and their relationship.

The film explores how love and human emotions survive when circumstances are far from ordinary.

Is The ‘Naxal Film’ Tag Becoming A Problem?

The certification wait has also raised a larger question within film circles — whether films set against sensitive political or conflict-related backgrounds are sometimes viewed primarily through their subject matter rather than their larger narrative.

In the case of Sahiya, the makers believe that looking at the film only through the prism of Naxalism could potentially overlook its emotional core.

The jungle, according to the film’s premise, is not merely a space associated with conflict. It is also the setting where the protagonists meet, understand each other and develop a relationship.

Real Jharkhand Locations

The film was shot in and around Netarhat and other real locations in Jharkhand, giving the story an authentic visual setting. Rather than recreating the environment, the team chose real landscapes to bring the world of the characters closer to reality.

For first-time feature director Sanjay Sharma, the challenge has been to tell a personal and emotional story within a complex social environment.

Certification Wait Adds To Anticipation

With Sahiya still awaiting its CBFC certificate after the preview, the film’s certification journey has become a talking point ahead of its eventual release.

For now, it would be premature to conclude that the film has faced censorship specifically because of its Naxal-affected setting. The official certification process is still underway.

What remains interesting, however, is whether Sahiya will ultimately be discussed as a film about Naxalism — or recognised for what its makers say lies at its heart: a love story born in the middle of a troubled landscape.

As the film waits for certification, the question surrounding Sahiya is increasingly becoming one of perspective — is it a Naxal story with a love angle, or a love story set against a Naxal-affected backdrop?

 

Shantanu Maheshwari–Rinku Rajguru Starrer ‘Sahiya’ Still Awaits CBFC Certificate After Preview

Mr. Hitesh Nihalani Marks 20+ Years With Crown Construction And N K Builders & Developers...

Mr. Hitesh Nihalani, Partner at Crown Construction Company and N K Builders & Developers, celebrates more than two decades of leadership in Mumbai’s construction and real estate sector.

With over 20 years of hands-on experience, Mr. Hitesh Nihalani has played a pivotal role in shaping residential developments across the city. Under his stewardship, both Crown Construction Company and N K Builders & Developers have built a reputation for quality construction, on-time delivery, and transparent business practices.

“Real estate is about more than buildings. It’s about trust,” is his belief. “For 20 years, our focus has been on creating durable, well-designed spaces and maintaining long-term relationships with our clients, partners, and communities.”

Known for combining traditional construction values with modern design and compliance standards, Mr. Hitesh Nihalani has guided his companies through multiple market cycles while adapting to new materials, technologies, and buyer expectations. His projects are recognized for efficient space planning, structural integrity, and customer-centric execution.

As Mumbai continues to grow, Crown Construction Company and N K Builders & Developers remain committed to delivering projects that balance quality, affordability, and sustainability. Mr. Nihalani continues to lead the firms with a vision to build not just structures, but communities people are proud to be part of.

About Crown Construction Company & N K Builders & Developers

Crown Construction Company and N K Builders & Developers are Mumbai-based real estate and construction firms specializing in residential and commercial development.

With a legacy of 35+ years, the companies focus on quality, timely delivery, and ethical business practices.

Mr. Hitesh Nihalani Marks 20+ Years With Crown Construction And N K Builders & Developers

भारत पॉडकास्ट पर जांच विशेषज्ञ दीपक कुमार का खुलासा: कॉर्पोरेट फ्रॉड से वैवाहिक विवादों तक ऐसे होती है प्राइवेट इन्वेस्टिगेशन...

नई दिल्ली। कॉर्पोरेट फ्रॉड, वैवाहिक विवाद, लापता लोगों की तलाश और साइबर अपराध जैसे मामलों में प्राइवेट इन्वेस्टिगेशन कैसे काम करती है, इसे लेकर स्नूप के संस्थापक एवं जांच विशेषज्ञ दीपक कुमार ने भारत पॉडकास्ट पर कई अहम खुलासे किए। पॉडकास्ट के होस्ट दीपक सारस्वत के साथ खास बातचीत में उन्होंने कॉर्पोरेट धोखाधड़ी, डिजिटल फुटप्रिंट, एसेट ट्रेसिंग और साइबर फ्रॉड से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।

दीपक सारस्वत के कॉर्पोरेट फ्रॉड से जुड़े सवाल पर दीपक कुमार ने दावा किया कि करीब 59 फीसदी भारतीय कंपनियां किसी न किसी रूप में कॉर्पोरेट फ्रॉड का सामना कर चुकी हैं। उन्होंने ग्रेटर नोएडा के एक मामले का जिक्र करते हुए बताया कि करीब 15 हजार रुपये मासिक वेतन पाने वाले एक कर्मचारी ने कथित तौर पर डेढ़ साल में कंपनी से करीब 60 लाख रुपये का गबन कर लिया था। उनके मुताबिक ऐसे मामलों में वित्तीय लेनदेन, दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण होती है।

पॉडकास्ट में दीपक कुमार ने एक अन्य मामले का उल्लेख करते हुए दावा किया कि उनकी टीम ने दिल्ली के एक रियल एस्टेट डेवलपर की बहन को करीब 35 घंटे में ट्रेस कर लिया था। उन्होंने बताया कि जांच में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी, डिजिटल फुटप्रिंट और अन्य वैध जांच तकनीकों से मिले सुरागों का इस्तेमाल किया जाता है।

दीपक सारस्वत ने तलाक और वैवाहिक विवादों में प्राइवेट इन्वेस्टिगेशन की भूमिका पर भी सवाल किए। दीपक कुमार के मुताबिक ऐसे मामलों में एसेट ट्रेसिंग के जरिए उपलब्ध कानूनी और सार्वजनिक रिकॉर्ड के आधार पर संपत्ति एवं वित्तीय स्थिति से संबंधित जानकारी जुटाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी में कुछ जांच सेवाओं की शुरुआती फीस करीब 25 हजार रुपये है, जबकि जटिल मामलों में खर्च लाखों रुपये तक पहुंच सकता है।

साइबर अपराध और यूपीआई फ्रॉड पर चर्चा करते हुए दीपक कुमार ने कहा कि डिजिटल धोखाधड़ी होने के बाद जितनी जल्दी शिकायत की जाए, उतना बेहतर है। उन्होंने लोगों को संदिग्ध ऐप डाउनलोड करने से बचने, निजी डेटा साझा करते समय सावधानी रखने और अपने डिवाइस की सुरक्षा अपडेट रखने की सलाह दी। साइबर फ्रॉड होने पर पीड़ित को तुरंत बैंक और आधिकारिक साइबर अपराध शिकायत व्यवस्था से संपर्क करना चाहिए।

भारत पॉडकास्ट के होस्ट दीपक सारस्वत और जांच विशेषज्ञ दीपक कुमार के बीच हुई इस खास बातचीत में प्राइवेट इन्वेस्टिगेशन की बदलती दुनिया के कई पहलू सामने आए। दीपक कुमार ने कहा कि डिजिटल दौर में जांच के तरीके तेजी से बदले हैं, लेकिन किसी भी जांच में कानून, निजता और वैध प्रक्रिया का पालन करना सबसे महत्वपूर्ण है।

भारत पॉडकास्ट पर जांच विशेषज्ञ दीपक कुमार का खुलासा: कॉर्पोरेट फ्रॉड से वैवाहिक विवादों तक ऐसे होती है प्राइवेट इन्वेस्टिगेशन

भारत पॉडकास्ट पर सौरभ सिन्हा ने खोले ज्योतिष, विवाह, करियर और वास्तु से जुड़े कई राज...

पुणे। ज्योतिष, न्यूमरोलॉजी, पाल्मिस्ट्री और वास्तु से जुड़े कई दिलचस्प पहलुओं पर ज्योतिष विशेषज्ञ सौरभ सिन्हा ने भारत पॉडकास्ट पर खुलकर अपनी बात रखी। भारत पॉडकास्ट के होस्ट दीपक सारस्वत के साथ खास बातचीत में उन्होंने विवाह, कुंडली मिलान, करियर, वास्तु और जीवन की परेशानियों से जुड़े सवालों पर अपने विचार और अनुभव साझा किए।

पॉडकास्ट के दौरान दीपक सारस्वत ने ज्योतिष की विश्वसनीयता, भविष्यवाणी, विवाह में कुंडली मिलान, मंगल दोष, बच्चों के करियर और वास्तु से जुड़े कई सवाल सौरभ सिन्हा के सामने रखे। जवाब में सिन्हा ने कहा कि ज्योतिष को भविष्य की हर घटना की गारंटी देने वाली व्यवस्था के बजाय मार्गदर्शन के माध्यम के रूप में समझना चाहिए। उनके मुताबिक ज्योतिष संभावित परिस्थितियों की दिशा दिखा सकता है, लेकिन किसी घटना की निश्चित गारंटी नहीं दे सकता।

कुंडली में सिर्फ 36 गुण मिलना पर्याप्त नहीं

विवाह और कुंडली मिलान पर सौरभ सिन्हा ने कहा कि केवल 36 गुण मिलने के आधार पर किसी वैवाहिक रिश्ते की सफलता तय नहीं की जा सकती। गण, भकूट, नाड़ी और ग्रहों की स्थिति सहित कुंडली के अन्य पहलुओं को भी देखा जाना चाहिए। मंगल दोष पर भी उन्होंने विभिन्न पारंपरिक उपायों का उल्लेख किया और लोगों को किसी भी उपाय को अपनाने से पहले पूरी जानकारी लेने की सलाह दी।

सौरभ सिन्हा ने ज्योतिष के नाम पर लोगों को डराने या किसी घटना की गारंटी देने वालों से सावधान रहने की बात कही। उनका कहना था कि सही ज्योतिषी का काम किसी व्यक्ति में भय पैदा करना नहीं, बल्कि उसे परिस्थितियों को समझने और बेहतर निर्णय लेने में मार्गदर्शन देना है।

वास्तु, बच्चों के भविष्य और करियर पर चर्चा

दीपक सारस्वत ने बातचीत के दौरान घर के वास्तु और उसके कथित प्रभावों को लेकर भी सवाल किए। सौरभ सिन्हा ने घर के अलग-अलग हिस्सों की दिशा और संरचना से जुड़ी कई वास्तु मान्यताओं के बारे में बताया। हालांकि वास्तु के ऐसे प्रभावों को लेकर वैज्ञानिक प्रमाण स्थापित नहीं हैं और इन्हें पारंपरिक मान्यताओं के रूप में देखा जाता है।

बच्चों के भविष्य और करियर को लेकर सौरभ सिन्हा ने कहा कि ज्योतिषीय परंपराओं में जन्म समय और नामकरण को महत्व दिया जाता है, लेकिन बच्चों के करियर का चुनाव उनकी रुचि, क्षमता और शिक्षा को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। उन्होंने शुरुआती वर्षों में शिक्षा और व्यक्तित्व विकास पर विशेष ध्यान देने की बात कही।

कर्ज और परेशानियों के पारंपरिक उपायों का भी जिक्र

आर्थिक परेशानियों और कर्ज से जुड़े सवालों पर सौरभ सिन्हा ने पशुओं की सेवा सहित कुछ पारंपरिक उपायों का उल्लेख किया। लगातार परेशानियों की स्थिति में उन्होंने नमक से उतारा करने जैसी प्रचलित मान्यताओं का भी जिक्र किया। हालांकि ऐसे उपाय धार्मिक और पारंपरिक विश्वासों पर आधारित हैं तथा इनके प्रभाव के वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।

सौरभ सिन्हा ने कर्म के महत्व पर भी जोर देते हुए कहा कि अच्छे कर्मों का परिणाम हमेशा तुरंत दिखाई नहीं देता, लेकिन व्यक्ति के जीवन में उसके व्यवहार और कर्मों का महत्व बना रहता है।

ज्योतिष का उद्देश्य डराना नहीं, मार्गदर्शन देना है

सौरभ सिन्हा ने ज्योतिष के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की जिम्मेदारी पर भी बात की। उन्होंने कहा कि लोगों की निजी समस्याओं और जानकारियों को गोपनीय रखना जरूरी है और ज्योतिष को केवल कमाई का माध्यम बनाकर किसी की भावनाओं या डर का फायदा नहीं उठाया जाना चाहिए।

भारत पॉडकास्ट के होस्ट दीपक सारस्वत और ज्योतिष विशेषज्ञ सौरभ सिन्हा के बीच हुई इस खास बातचीत में विवाह, कुंडली, भविष्यवाणी, वास्तु, करियर और कर्म जैसे विषयों पर कई सवाल-जवाब हुए। सिन्हा के मुताबिक ज्योतिष का उद्देश्य भविष्य की गारंटी देना नहीं, बल्कि व्यक्ति को अपनी परिस्थितियों को समझने और बेहतर निर्णय लेने के लिए मार्गदर्शन देना होना चाहिए।

भारत पॉडकास्ट पर सौरभ सिन्हा ने खोले ज्योतिष, विवाह, करियर और वास्तु से जुड़े कई राज

अघोरी गोपाल ने भारत पॉडकास्ट पर खोले तंत्र साधना और वशीकरण के रहस्य...

राजस्थान। तंत्र साधना, अघोर परंपरा और वशीकरण की रहस्यमयी दुनिया को लेकर अघोरी गोपाल ने भारत पॉडकास्ट पर कई रोचक बातें साझा कीं। भारत पॉडकास्ट के होस्ट दीपक सारस्वत के साथ खास बातचीत में उन्होंने अघोर साधना, श्मशान साधना, कर्ण पिशाचिनी, मंत्र शक्ति और वशीकरण से जुड़ी मान्यताओं तथा अपने अनुभवों के बारे में विस्तार से बताया।

पॉडकास्ट के दौरान होस्ट दीपक सारस्वत ने अघोरियों की रहस्यमयी जीवनशैली, श्मशान में होने वाली साधनाओं, भस्म धारण करने, वशीकरण और कथित अलौकिक शक्तियों को लेकर कई सवाल पूछे। इन सवालों के जवाब में अघोरी गोपाल ने बताया कि उनका पालन-पोषण अघोर परंपरा के वातावरण में हुआ और बचपन से ही उन्हें एक अघोरी गुरु का सानिध्य मिला।

अघोरी गोपाल के मुताबिक अघोर परंपरा में प्रवेश करना आसान नहीं है। साधक को सांसारिक मोह और भय से ऊपर उठकर स्वयं को भगवान शिव की आराधना और कठिन साधना के लिए समर्पित करना पड़ता है। उन्होंने श्मशान को अघोर साधना का महत्वपूर्ण स्थान बताया।

कर्ण पिशाचिनी साधना पर उन्होंने दावा किया कि यह बेहद कठिन और दुर्लभ साधनाओं में से एक है और इसे सिद्ध करने में कई वर्ष लग सकते हैं। उनके अनुसार इस साधना के माध्यम से भूत, वर्तमान और भविष्य से जुड़ी जानकारी प्राप्त होने की मान्यता है। हालांकि इस तरह के अलौकिक दावों की वैज्ञानिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

पॉडकास्ट में वशीकरण और मोहनी साधना पर भी चर्चा हुई। दीपक सारस्वत के सवालों का जवाब देते हुए अघोरी गोपाल ने दावा किया कि तंत्र परंपरा में वशीकरण के अलग-अलग प्रकार बताए गए हैं। उन्होंने अपने पास आए कुछ व्यक्तिगत मामलों का उदाहरण देते हुए महादेव की आराधना और तांत्रिक साधना के माध्यम से लोगों की समस्याओं में सहायता करने का दावा किया। हालांकि किसी व्यक्ति के मन या व्यवहार को वशीकरण से नियंत्रित करने के दावों की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है।

अघोरी गोपाल ने भस्म धारण करने, आत्माओं से जुड़ी मान्यताओं और श्मशान साधना पर भी अपनी बात रखी। उनके मुताबिक अघोर परंपरा का मूल केंद्र भगवान शिव की आराधना है। उन्होंने कर्म के सिद्धांत पर जोर देते हुए लोगों को अच्छे कर्म करने और भगवान शिव की भक्ति करने का संदेश दिया।

भारत पॉडकास्ट के होस्ट दीपक सारस्वत और अघोरी गोपाल के बीच हुई इस खास बातचीत में तंत्र और अघोर की रहस्यमयी दुनिया से जुड़े कई अनछुए पहलुओं पर चर्चा हुई। हालांकि तंत्र, वशीकरण, आत्माओं से संवाद और भविष्य जानने जैसी अलौकिक शक्तियों से जुड़े दावों के वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए ऐसे दावों को लेकर सावधानी और विवेक बरतना जरूरी है।

 

अघोरी गोपाल ने भारत पॉडकास्ट पर खोले तंत्र साधना और वशीकरण के रहस्य

आयुर्वेद से असाध्य रोगों का इलाज संभव है – भारत पॉडकास्ट पर बोले डॉ. शेख...

मथुरा। आयुर्वेद में कई गंभीर और लंबे समय से चली आ रही बीमारियों के उपचार की संभावनाएं मौजूद हैं। यह दावा आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. शेख ने भारत पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान किया। उन्होंने कैंसर, डायबिटीज, थायराइड, टीबी, अस्थमा सहित महिला एवं पुरुषों की यौन स्वास्थ्य समस्याओं में आयुर्वेदिक उपचार के उपयोग पर अपनी बात रखी।

डॉ. शेख ने बताया कि उनका परिवार करीब 120 से 130 वर्षों से आयुर्वेद के क्षेत्र से जुड़ा है। उनके मुताबिक उनकी सहारा फार्मेसी जीएमपी और आईएसओ प्रमाणित है तथा देश-विदेश में करीब 40 क्लीनिक संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को और अधिक महत्व दिए जाने की जरूरत है।

डायबिटीज पर चर्चा करते हुए उन्होंने खान-पान और जीवनशैली में सुधार पर जोर दिया तथा मेथी, करेला और विजयसार जैसे पारंपरिक उपायों का उल्लेख किया। उनका कहना है कि नियमित दिनचर्या और सही खान-पान कई जीवनशैली संबंधी समस्याओं के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

पॉडकास्ट में टीबी और अस्थमा पर भी चर्चा हुई। डॉ. शेख ने इन बीमारियों के लिए आयुर्वेद में उपलब्ध पारंपरिक उपचारों और अपने अनुभवों का जिक्र किया। हालांकि टीबी जैसी गंभीर संक्रामक बीमारी में प्रमाणित चिकित्सा और डॉक्टर की निगरानी बेहद जरूरी है तथा निर्धारित दवाएं स्वयं बंद नहीं करनी चाहिए।

महिला एवं पुरुषों की यौन स्वास्थ्य समस्याओं पर भी डॉ. शेख ने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने लिकोरिया, अनियमित मासिक धर्म, स्वप्नदोष, स्तंभन दोष और शीघ्रपतन जैसी समस्याओं में सही चिकित्सकीय सलाह लेने पर जोर दिया। साथ ही बिना डॉक्टर की सलाह के यौन क्षमता बढ़ाने वाली दवाओं के इस्तेमाल से बचने की बात कही।

डॉ. शेख ने चिकित्सा क्षेत्र में बढ़ते व्यावसायीकरण और अनावश्यक जांचों को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि चिकित्सा का पहला उद्देश्य मरीज को उचित और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराना होना चाहिए। उन्होंने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर भी अभिभावकों को ध्यान देने और उनसे खुलकर संवाद करने की सलाह दी।

डॉ. शेख ने आयुर्वेद को भारतीय चिकित्सा की प्राचीन और महत्वपूर्ण विरासत बताते हुए कहा कि इस पर आधुनिक स्तर पर और अधिक शोध एवं जागरूकता की आवश्यकता है। भारत पॉडकास्ट में हुई इस बातचीत के दौरान आयुर्वेद, आधुनिक जीवनशैली, खान-पान और स्वास्थ्य से जुड़े कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

हालांकि कैंसर, टीबी, डायबिटीज और अन्य गंभीर बीमारियों में किसी भी वैकल्पिक उपचार को अपनाने या चल रही दवाओं को बंद करने से पहले योग्य चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी है।

 

आयुर्वेद से असाध्य रोगों का इलाज संभव है – भारत पॉडकास्ट पर बोले डॉ. शेख